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Hymn No. 1073 | Date: 15-May-1999
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होंगे तेरे दिवाने हजारो-हजार, करता होगा उनसे तू बहुत प्यार ।
होंगे तेरे दिवाने हजारो-हजार, करता होगा उनसे तू बहुत प्यार ।
उस कतार में हूँ सबसे पीछे खड़ा, देखके उनको रहता हूँ तेरी मस्ती में डूबा ।
उनका झूमना याद दिलाता है तेरे प्यार की, कर जाते है खत्म मन के सारे भेद
या तो वे तेरे गीतो को लिखते हैं, या तो डूबके सुनाते है तुझको ।
फ्रिक न होती है जमाने की उनको, तेरे सिवाय जिकर भी न करते है किसीकी
दीवानगी उनकी चढ़ती है जब परवान तो, मस्त हो जाता है सारा समाँ ।
बंन्द जाता है प्यार में तू इनके इतना, खो बैठता है होश तू अपना ।
देखने उनके प्यार को देवतागण खिंचे चले आते है धरा पे जो नसीब न होता है स्वर्ग में ।
छिपी रहती है अमोघ शक्ति, उसके आगे चलती नहीं किसीकी ।
तोड़ना होता है मुश्किल इस बंधन को, प्रभु-प्रभु बनाके समा लेते है अपने भीतर।


- डॉ.संतोष सिंह