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Hymn No. 1074 | Date: 16-May-1999
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ऐसा कौन सा कर्म हो गया हमसे, जो तेरे दिल को दुखा दिया ।
ऐसा कौन सा कर्म हो गया हमसे, जो तेरे दिल को दुखा दिया ।
तुझे खुश करने के अलावा, हमने कभी कुछ सोचा न था ।
जब याद किया प्यार के वास्ते, बनती-बिगड़ी दोनों में साथ लिया तेरा ।
स्वार्थ होगा कुछ भी, पर प्यार तो था तुझसे बहुत पहले से ।
मेरा किया और कहाँ हुआ कुछ न मायने रखता है, हाँ तेरी बात है महत्व की।
साथ तेरा इसलिये खोजा था, तेरा प्रेम कहलाऊं मैं ।
मेरा मालिक है तू सदा से, तेरे चरणों के है हम बंदे।
चूक-अचूक जो भी किया, बनके तेरा करुं, न हो मेरा कोई भाव ।
बदलना तुझको है, पल-पल करीब रहूँगा तेरी आशीष से ।
कृपा किया है हमपे सदा से, कृपा रहे तेरी सदा ।


- डॉ.संतोष सिंह