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My Divine Blessing
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Hymn No. 105 | Date: 19-Jul-1997
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आ गये है तेरे दर पे तेरे दीवाने
आ गये है तेरे दर पे तेरे दीवाने
दीदार हो गया तेरा झूम उठे है तेरे दीवाने
तेरी नजरों की इनायत चाहते है तेरे दीवाने
तेरे कदमों में बिछने को तैयार है तेरे दीवाने
सब कुछ लुटाने को तैयार है तुझपे तेरे दीवाने
तेरे ही रहमों करम पे जिंदा है तेरे दीवाने
हर श्वास के संग लेते है तेरा नाम तेरे दीवाने
हर कण में तेरी छवि ढूँढ़ लेते है तेरे दीवाने
तेरी हर बात पे कायल है तेरे दीवाने
उडना चाहते है तेरे संग अनंत गगन में तेरे दीवाने
सुध – बुध खो के तूझ में रमना चाहते है तेरे दीवाने
गुरू पुर्णिमा के दिन सद्गुरूदेव को सादर अर्पित ।
- डॉ.संतोष सिंह
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ऐसी कैसी है तेरी खुदाई, सही नहीं जात है मुझसे तेरी जुदाई ।
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