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Hymn No. 106 | Date: 11-Aug-1997
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बिखरे हुये शब्द है मेरे टूटा हुआ दिल है,
बिखरे हुये शब्द है मेरे टूटा हुआ दिल है,
पर दिल का हर एक कोना साफ है तेरे लिये ।
कंपकपाते हुये हाथों से तूडे – मुड़े हुये अक्षरों से ;
तेरी दुआ के सहारे साहस करता हूँ तेरे गीतों को रचने की ।
आँखों में आँसू है सूखे हुए, आवाज भी रूध्द है मेरी ;
पर तेरी याद आने से दिल रोता है जार – जार मेरा ।
हवा का अहसास होते ही सर्द हो जाता है तन मेरा ;
बेखयाली में भी मेरे मन का हर कोना हर पल सूना है तेरे लिये ।
पवन के कई थपेडों को सहा है बेजान सा इस जिस्म ने ;
हर पल रहता है इंतजार तेरे आने का मेरी सूनी आँखों को ।


- डॉ.संतोष सिंह