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Hymn No. 107 | Date: 20-Aug-1997
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मेरी जुबां पे बस है नाम तेरा, हर वक्त दिल भी है तुझमें डूबा ।
मेरी जुबां पे बस है नाम तेरा, हर वक्त दिल भी है तुझमें डूबा ।
करता है सलाम तूझे रोम – रोम, तन – मन से हो गया हूँ मैं तेरा ।
इधर – उधर, किधर भी जाऊँ, पहुँच जाता हूँ तेरे दर की ओर ।
सच कहुँ, सुझाई ना देता है अब कुछ मुझको तेरे सिवाय ।
पास आना, दूर जान तुझसे, ये खेल खेलने का मन ना होता है अब ।
समझता है तू सब कुछ, कब तू हमारे करीब होगा हर पल ।
तडपता हूँ मैं हर पल नाम लेते हुए तेरा ।
पक्षताये चाहता हूँ, तेरे साथ होके रह जान चाहता हूँ ।


- डॉ.संतोष सिंह