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Hymn No. 108 | Date: 27-Aug-1997
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दिल मचल – मचल जाता हैं तेरे पास आने को,
दिल मचल – मचल जाता हैं तेरे पास आने को,
आँखें छलक – छलक जाती है तुझसे दूर हो जाने पे ।
तेरे साथ हर मुलाकात एक यादगार लम्हा है मेरे लिये;
मेरे जीवन का हर लम्हा बेरंग है तेरे बिना ।
तेरी गुलामी में छुपी हुयी है मेरी सच्ची आज़ादी ;
बेखौफ हो के खुद को भूल के मिलने का है इंतजार ।
मेरा तन जुदा हो जाये तुझसे, मन जुदा ना हो पायेगा ;
तेरी ही अनंत दुनिया का एक क्षुद्र हिस्सा हूँ मैं ।
सब कुछ लागे तू मेरा, कौन है मेरा तेरे सिवाय ;
जब – जब जागा तुझको पाया हर भूल पे मैं पछताया ।


- डॉ.संतोष सिंह