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Hymn No. 109 | Date: 04-Sep-1997
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तेरे नाम का जाम पीते ही, मस्ती छा जात है तन मन में ।
तेरे नाम का जाम पीते ही, मस्ती छा जात है तन मन में ।
मन मेरा ये कहता है हर वक्त, लिपट जाने को तेरे दामन में ।
होश में न आना है मुझको, चाहे समझे जमाना दीवाना ।
मेरा प्यार तू है तेरे प्यार में हूँ दीवाना, अंजान है इससे जमाना ।
यह कैसी आशिकी है दिल भी मैंने तुझको दिया, दर्द भी मैंने तुझसे पाया ।
जी नहीं सकती तेरे बिना जिसने पाया तेरा मजा हो नहीं सकता तुझसे जुदा ।
तेरे हर अंदाज पे कूर्बान है मेरी सारी अमानत तो भी वो कुछ भी नहीं ।
ऐ मेरे प्यारे, न्यारें, अनोखे, अदभुत सद्गुरू देव काका श्री महाराज की जय ।


- डॉ.संतोष सिंह