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Hymn No. 1078 | Date: 17-May-1999
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मै नहीं जाना, मैं नहीं जाना उस ओर, जहाँ तेरे सिवाय हो कुछ ओर ।
मै नहीं जाना, मैं नहीं जाना उस ओर, जहाँ तेरे सिवाय हो कुछ ओर ।
डरता हूँ अभी बहुत कुछ को लेके, जो च्युत कर सकती है मुझे डगर से ।
हाथ जोड़के करता हूँ कबूल, मेरे वश में न है जो दूर कर सकूं कमिँया अपनी।
जैसा भी हूँ प्रभु तेरा ही हूँ, कर ले मेरी प्रार्थना तू मंजूर ।
मुझमें से जो चाहिये ,तू ले ले, जो लगे तुझे नागवार निकाल के फेंक दे तू उसे।
हक है तेरा पूरा मुझपे, तुझसे उपजा हुआ हूँ तेरी ही छाया हूँ ।
रहता हूँ दिन-रात सत्ता में तेरी, कैसे चलेगा किसी और का शासन मुझपे ।
सांसत में पड़ गयी है मेरी जान, जिसको छोड़ा था वही मिल गया राह में ।
भूत जब याद आता है सिहर उठता हूँ भूतल से, मुझे नहीं जाना है उस ओर ।
प्रभु मेरे वश में न था आना इस ओर, लाया जब तू यहाँ तो छोड़ना नहीं मध्य में ।


- डॉ.संतोष सिंह