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Hymn No. 1080 | Date: 17-May-1999
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काका कुछ ऐसा कर दूँ खुश हो जाये तू मुझपे सदा के लिये ।
काका कुछ ऐसा कर दूँ खुश हो जाये तू मुझपे सदा के लिये ।
बांध ले तू मुझे आजन्म बंधन में, सँवर जाये जन्म लेना मेरा ।
बेपनाह मुहब्बत करुं तुझसे, टूटे जो सारे बंधन तन-मन के ।
आये राह में कोई भी मुश्किल, पार कर जाऊं नाम लेके तेरा ।
किसी भी सूरत में न मानूं हार, करुँ हर कार्य पूरा मगन होके तुझमें ।
कोई कहे कुछ भी, यार तेरे सिवाय परवाह न करुँ किसीकी ।
प्यार को छोड़के न जाना है कहीं और, प्यार तो है यार तेरा ।
कृपा के सिवाय न है कोई विशालता, जो मजबूर बना दे तुझे मेरा होने को ।
जब चाहे जो तू ले ले मुझसे, तेरे दिये हुये के सिवाय कुछ न है पास मेरे ।
एक ही है तमन्ना कैसे भी करके खुश कर दूं तुझे, उस खुश के पीछे लुटा दूँ खुदको ।


- डॉ.संतोष सिंह