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Hymn No. 1082 | Date: 18-May-1999
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गुनगुनाते हुये बोलों को, ढाल दे तेरे गीतो में ।
गुनगुनाते हुये बोलों को, ढाल दे तेरे गीतो में ।
चुपके-चुपके मुलाकातों को, बदल दे प्यार भरी महफिल में ।
सारे कयासो का अंत कर दे, हो जाये तू मेरे दिल के पास इतना ।
प्यार का जुनून छा जाये हमपे इतना, गुम हो जाये प्यार में तेरे ।
हर कोई क्या करेंगा, दिल से छलकता रहेगा प्यार जब हर पल ।
निकाल ले चल जीवन को दलदल से, डूबना हो जाये खत्म मेरा ।
मुझे न हो कुछ खबर, रहूं मैं इतना तुझमें बेखबर ।
हर विघ्न पार करता चला जाऊं, तेरा नाम लेते हुये ।
गलत और सही राहों पे न है जाना, तेरा बताया हुआ है करना ।
मार दे मुझे प्यार से इतना, रह न जाये कहीं मेरा मैं ।


- डॉ.संतोष सिंह