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Hymn No. 1087 | Date: 20-May-1999
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मैं दीप बनके जलूं तेरे सामने, तो कहूँगा वाह रे क्या किस्मत है ।
मैं दीप बनके जलूं तेरे सामने, तो कहूँगा वाह रे क्या किस्मत है ।
मैं फूल बनके चढूं तेरे श्री चरणों में, तो कहूंगा वाह रे क्या किस्मत है ।
मैं पायरी बनूँ तेरे दर की, पड़े चरण तेरे भक्तों के तो कहूंगा वाह रे क्या किस्मत है ।
मैं धूल बनूँ पड़ गये चरण तेरे तो कहूंगा, वाह रे क्या किस्मत है ।
मैं मानव तन पाके बन जाऊं दास तेरा तो कहूँगा, वाह रे क्या किस्मत है ।
मैं तेरे बनाये जगका कोई कण बना तो कहूंगा, तो वाह रे क्या किस्मत है ।
मैं जल बनके प्यास बुझाऊं तेरे भक्तों की तो कहूंगा वाह रे क्या किस्मत है ।
मैं जो भी रूप पाऊंगा तेरे हाथो के द्वारा तो कहूंगा वाह रे क्या किस्मत है ।
मैं मुलाकात कर लिया तुझसे अगर ख्वाबो से में तो कहूंगा वाह रे क्या किस्मत है।
मैं मरा तेरे दर के आगे तो कहूंगा वाह रे क्या किस्मत है ।


- डॉ.संतोष सिंह