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Hymn No. 1090 | Date: 21-May-1999
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अंदाज अपना है कुछ अलग, प्यार करने का ।
अंदाज अपना है कुछ अलग, प्यार करने का ।
प्यार करके न जताने का, दिल ही दिल में आहें भरने का ।
रह नहीं सकता अपने साँवरे की मूरत देखे बगैर ।
कहना तो बहुत कुछ चाहता हूँ, पता नहीं क्यों कुछ कह नही पाता हूँ ।
राहत नहीं मिलती है दिल को बगैर मिले उससे ।
मिलने के बाद कसम से, जुदा होने का मन नहीं करता ।
क्या होगा मेरा हाल प्यार में उसके, कुछ, खबर न है ।
हम तो छोड़ चुके हैं सब कुछ, हाथो में उसके ।
बेशर्म कह लो या प्यार का जोर, मिट रही है सारी दूरियाँ ।
हर पर्दे को हटा देना चाहता हूँ, उसके और मेरे बीच के ।


- डॉ.संतोष सिंह