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Hymn No. 1091 | Date: 22-May-1999
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ऐ स्वामी बना ले मोहे तेरा अश्व, रखना लगाम हाथों में अपने ।
ऐ स्वामी बना ले मोहे तेरा अश्व, रखना लगाम हाथों में अपने ।
रहूँगा तेरी चाकरी में दिन-रात, वश में रखना अपने तू सदा ।
थोडी भी ढील ना देना, गर कही जो तू चाहे सुनके-अनसुना तो करना मेरी बात।
बिदकने पर तू ना ध्यान देना, तेरी मर्जी हो तब कसना और ढील देना मेरी लगाम को ।
जब तक रहेगी हाथों में तेरे लगाम मेरी, मेरा मन रहेगा चरणों में तेरे ।
धीरे-धीरे रास आने लगेगा, तन के बंधन को भुलकर देखते ही तुझे थिरकने लगूँगा।
इसमें कोई दो राय न है, दिल को न जाने कितने कालों से तुझसे है प्यार ।
की है मन ने मनमानी, जो चाहे तू देना सजा, समझेंगे उसे तेरा प्यार सदा ।
सही-गलत कुछ नहीं मैं मानता, प्रभु ये दिल तुम्हारे सिवाय कुछ नहीं जानता।


- डॉ.संतोष सिंह