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Hymn No. 1092 | Date: 22-May-1999
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जो भी कह ले तू आज मुझे है कबूल, हम भी कहेंगे दो टूक है मुझे तुझसे प्यार ।
जो भी कह ले तू आज मुझे है कबूल, हम भी कहेंगे दो टूक है मुझे तुझसे प्यार ।
मन में होंगी हजार बातें, करते है कबूल, दिल में तुम्हारे सिवाय किसी और का नहीं ख्याल ।
मौका मिलते ही सताने को रहती हू तैयार मेरी इच्छाएँ, कोई रंज नहीं धीरे-धीरे हो जाएँगे बेखबर प्यार में तेरे ।
जीवन का दस्तूर है, पीछा छुटता है सबसे, छुटता नही अपने कर्मों से, तेरे प्यार में हमें हर सजा है मंजूर ।
डिगा नहीं सकता, होगा प्रबल कितना भी काम, दंभ की बात नहीं करता, ये तो विश्वास है प्यार पर अपने ।
निरर्थक और अर्थपूर्ण जीवन में भेद कुछ ना रहा, तेरे प्यार में शब्दों के मायने को बदलते देखा ।
आँखों पर से माया का परदा तुमने उठाया, थी श्रद्धा हमारे भीतर, आशीष मिलते ही बढ़ती चली गई ।
रोक न पाएगा अब कोई हमें, विश्वास से परिपूर्ण हो चुका हूँ जो दिलने चखा प्यार को तेरे ।
डगर हो कितनी भी अंजान, तेरे कदमों के निशान के सहारे बढ़ते जाएँगे जरूर
कोई कर ले कुछ भी, रूकना हो गया है मुश्किल, बेखबर हो गए हम तुझमें, बढने की जगह बहते जाएँगे जरूर ।


- डॉ.संतोष सिंह