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Hymn No. 1094 | Date: 23-May-1999
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तेरा-मेरा साथ सूर्य और प्रकाश की भांती ।
तेरा-मेरा साथ सूर्य और प्रकाश की भांती ।
उपजे है जब तुझसे तो अलग कैसे हुए ।
कितना भी चाहे तू हो जाए दूर, पर हो नहीं सकता अलग ।
मजबूर होकर ना जुड़ना तू मुझसे, जब भी जुड़ना स्वेच्छा से ।
मिलन तो सर्वोत्कृष्ट परम परिणीती है प्यार की ।
मन तो है निशानी है क्षुद्रता की जब चाहे नचाए हम को ।
जिसने काबू पाया इसमें, उसने राज किया तेरी अनंत सत्ता पर ।
बता नहीं सकता कोई तेरा पता, जाता है इन अँधियारी गलियों से ।
यार करते है हम प्यार, ऊटपटाँग कर्मो से रखना तू दूर ।
गरूर था न कोई अगर, है तो तोड़ दे तू उसे ।


- डॉ.संतोष सिंह