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Hymn No. 1097 | Date: 24-May-1999
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ज्यों-ज्यों कदम बढ़ने लगे उसकी ओर, प्यार में मगन होने लगा ।
ज्यों-ज्यों कदम बढ़ने लगे उसकी ओर, प्यार में मगन होने लगा ।
दिल में मच गई हलचल उमंगों की, सूझता ना है मस्ती के सिवाय कुछ ।
आनंद का ज्वार उमड़े कही भीतर से, हर बात में आनंद आने लगा ।
जो भी शब्द उभरते थे जुबाँ पर, ढलने लगे गीतों के रूप में ।
तन तो था धरा पर, साथ पाकर प्यार का, दिल आसमान में उडने लगा ।
होशो-हवास खो गया, ज्यों-ज्यों प्यार में मगन मैं होने लगा ।
खुशियो का कोई ठोस कारण न था, फिर भी यूँ ही रहता था खुश ।
मचा जाती थी हलचल, जो पवन आती थी उसके दर की ओर से ।
जोर मुझपर मेरा ना चलता था, रहता था हर पल जुनुन प्यार का ।
सच पूछो तो जीने का होश न था, खोता जा रहा था प्यार में ।


- डॉ.संतोष सिंह