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Hymn No. 1098 | Date: 24-May-1999
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समा बाँध देता है, महफिल में तेरा आना ।
समा बाँध देता है, महफिल में तेरा आना ।
देखकर तेरी दरियादिली, नम हो जाती है आँखें हमारी ।
चुनते है लोग दामन में फूल, तुमने चुना हम काँटों को ।
सिखाया तुमने प्यार देकर, प्यार करना अपने-परायों से ।
जीवन के अनजाने पहलुओं का, दीदार करता हूँ पास आकर तेरे ।
तेरी मोहब्बत में दम छुटते पाया माया के साए का ।
क्यों नहीं किया तुमने कुछ संसार के सारे दर्द सहकर हमारे वास्ते ।
गमों को समेटा दामन में अपने, बरसाया खुशियों को हमपर ।
मारे हुए थे प्रारब्ध के, मुक्त होना सिखाया तुमने कर्मो से ।
भजते थे अपनी चित्र- विचित्र इच्छाओं को, भान कराया भगवत स्वरूप का तुमने


- डॉ.संतोष सिंह