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Hymn No. 1101 | Date: 25-May-1999
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अब ना तलाश है हमें किसी और रास्ते की, आहिस्ते-आहिस्ते कदम बढ़ रहे है तेरी ओर ।
अब ना तलाश है हमें किसी और रास्ते की, आहिस्ते-आहिस्ते कदम बढ़ रहे है तेरी ओर ।
जुदाई का भय अब हमें सताता नहीं, दिल में जो तू आया बंद हुए रास्ते सारे दुनिया के ।
मेरे पहलु में अब तेरे सिवाय कोई न रह सकता, जो तेरे रंग में रँगा न होगा, दम घुटेगा उसका यहाँ ।
जान मेरी हो चुकी है तेरी, तेरी मोहब्बत के नशे में चुर-चुर हो गई सारी मजबुरीयाँ मेरी ।
मिट चुकी है सारी दूरियाँ तेरे-मेरे बीच की, जब से गुजरने लगी सुबह-शाम महफिल में तेरी ।
दिल खिल गया है तेरा प्यार पाकर, मुरझाने का डर नही, जो तू सींचे अमृत भरे गीतों से ।
ज्यों-ज्यों कदम बढ़ते गए तेरी ओर, रूकने का डर निकल गया, जो हमारा रूप तुझमें बदल गया ।
करनी प्यार की चर्चा हो गई है मुश्किल, जब से दिल समा गया तेरे दिल में ।
खामोशी अच्छी लगती है अब, आँखें बंद करके हर वक्त दीदार करने का है मन।
डर नहीं लगता अब किसी बात से, जो तू रहता है हमारे साथ-साथ सदा ।


- डॉ.संतोष सिंह