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Hymn No. 1103 | Date: 25-May-1999
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ૐ काका, श्री काका, जय काका, सिद्ध तेरा बाबा ।
ૐ काका, श्री काका, जय काका, सिद्ध तेरा बाबा ।
संतोष उसका पिता, सुमन उसकी माता ।
पर वह है पुत्र माता सिद्ध अंबिका के, जन्मा काका की कृपा से ।
रहता है सदा छत्र- छाया में, जग जननी माता के ।
मस्त रहता है अपनी मस्ती में, आदी नही किसी का ।
कब क्या करे खुदा को न हैं पता, हरकतें है शरारतों से भरी ।
मोहक है मुस्कान उसकी, करते है गान हर कोई उसका ।
सुबह को रट लगाए माँ माँ की, देखकर काका को अकस्मात चिल्लाता काका, काका ।
प्रभु तू करना कृपा उसपर, जो तू चाहे वही भरना दिल में उसके ।
सब कुछ हँसते हुए करते रहे, मस्ती के आलम में तेरे ।
- डॉ.संतोष सिंह
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