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Hymn No. 1104 | Date: 26-May-1999
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जन्म होने लगता है नगमों का, बैठते ही तेरे आगे ।
जन्म होने लगता है नगमों का, बैठते ही तेरे आगे ।
बिन बोले स्वर फूट पडते है, दिल की गहराइयों से ।
बेचैन मन हो जाता है शांत, तेरे करीब आते ही ।
सताती थी जो इच्छाएँ, हो जाता है अंत उनका सुनकर तेरे बोल ।
भर जाता हूँ उमंगों से, ज्यों-ज्यों डूबता हूँ तेरे गीतों में ।
बन जाता है हर कोई मीत मेरा, जब नाचता हूँ मस्ती में तेरे ।
तूफाँ का खौफ निकल गया मन से, जब से दिया हाथो में पतवार तेरे ।
किस्मत की कोई परवाह नहीं, जब से मिल गया साथ तेरा ।
कुछ ना चाहता हूँ अब, जो मेरे जीवन में तू आ गया ।
बहुत कुछ लेकर क्या करुँगा, हम तो डूबना चाहते है तेरे प्यार में ।


- डॉ.संतोष सिंह