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Hymn No. 1105 | Date: 26-May-1999
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अंत कर दे तू मेरे सारे फितरतों का, रंग जाऊँ में तेरे प्यार में ।
अंत कर दे तू मेरे सारे फितरतों का, रंग जाऊँ में तेरे प्यार में ।
तेरी उदारता की चर्चा सुनी है, एक खारे बूँद पर दे देता है अनमोल प्यार तेरा ।
हुजूर तेरे सिवाय कोई ना है मेरा, जरूरत है हमको बस तेरे प्यार की ।
कोई होगा कितना भी हँसी, तेरे समान नहीं, जगह दे तू मेरे प्यार को ।
बदल सकता है तू मेरी किस्मत को, जो उसमें न है, भर दे तेरे प्यार से ।
दुर्भाग्यों का अंत हुआ आते ही तेरे, तेरे प्यार से सौभाग्य फटा हमारे भीतर ।
बना ले तू मुझे तेरे जिगर का टुकडा, लबालब हो जाऊंगा तेरे प्यार से ।
प्यार करूँ तुझे इतना, हर पल लगे तू नया-नया, बीती बातें बिसार दूँ तेरे प्यार में ।
जो कुछ भी हो तेरे-मेरे बीच, आनंद से भरपूर हो, प्यार के सिवाय नामो-निशान न किसी और का ।
कोई बाजी जीतना नहीं चाहता, तेरे प्यार के सिवाय कुछ मंजूर ना हैं मुझे ।


- डॉ.संतोष सिंह