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Hymn No. 1107 | Date: 26-May-1999
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अफसाने हो प्यार में नये-नये, न की पुराने ।
अफसाने हो प्यार में नये-नये, न की पुराने ।
बनाने न पड़े कभी कोई गीत, बनते जाए प्यार में तेरे ।
खुद को तोड़ने-मरोड़ने से पहले, ढल जाना चाहूँ अनुरूप तेरे ।
ऊपर का स्वरूप कैसा भी हो, दिल के भीतर रहे तेरा रूप ।
जीवन में आए कैसा भी क्षण, मन में खनके तेरे बोल ।
करुँ कुछ भी दायित्वों को निभाने वास्ते, पर लक्ष्य हो बस तू ।
संसार में रहे चाहे किसी और का बोलबाला, पर तू रहना हमदम मेरा ।
घेरे हमको कितनी भी माया, पर न होना चित्त से मेरे दूर तू ।
हर रीत तू वह अपनाना, जो जरूरी हो तेरा बनने के वास्ते ।
अपनाया है तुमने तो उपजाना दिल से प्यार भरे गीत तेरे ।
- डॉ.संतोष सिंह
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