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Hymn No. 1108 | Date: 02-May-1999
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ॐ काका, क्या नहीं लगता तू हमारा, इस संसार में एक तू ही तो है सहारा ।
ॐ काका, क्या नहीं लगता तू हमारा, इस संसार में एक तू ही तो है सहारा ।
टूटते पाया सारे फसाने को एक-एक करके, तेरे सिवाय कोई काम न आया ।
काम की बात ना है कुछ, तेरे सिवाय मेरे दिल को कोई लुभा न पाया ।
नाता है तेरा-मेरा बड़ा अजीब, बाँधकर रखा है प्यार से, दिल के करीब ।
तोड़ना किसीके वश की बात ना है, मेरे तन-मन में जो तू है समाया ।
कमा सकूँ नहीं संसार में, कोई गल नही, कमा लिया हमने तेरा नाम धन ।
खर्च कितना भी करुँ, खर्च ना हो पाएगा कभी, दिन-दुना, रात चौगुना प्रेम से बढ़ते जाएगा ।
आदत लगा दी तुमने हमें बडी खराब, रहे कही भी, रह ना सकते तेरे बिन ।
डिगा नहीं सकता कोई मुझे प्यार करने से तुझे, तेरे प्यार भरे जादू से, प्यार में ढल गए हम ।
बदल गई मेरी सारी इच्छाएँ, अब सुझता नहीं कुछ मुझे, तेरे प्यार के सिवाय।


- डॉ.संतोष सिंह