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Hymn No. 1110 | Date: 28-May-1999
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सुन ले इक बार इस गरीब की बात तू, कर ले अपने करीब, हर के सारे ताप तू ।
सुन ले इक बार इस गरीब की बात तू, कर ले अपने करीब, हर के सारे ताप तू ।
न मन में है कुछ और होता होगा जब, तब की बात अलग, रहकर सबके संग जुड जाएगा मन तुझसे ।
कई बार होता है ऐसा, साथ में कोई और है, हम पहुँचते है पास तेरे ।
न जाने कौन-सा रोग है, कर दे कृपा, घिर जाए इससे सिमट के इस में ।
बहला ना आज तू हमको बातो में अपनी, दे दे मन मुताबिक मुझे आशिष।
कशीश का काम करेगी, बिन तेरे कोई दिल में बात न होगी ।
हम हो जाएँगे तेरे, तो तू हो जाएगा मेरा, उसके सिवाय कोई ख्याल न होगा ।
तोड़ दे मेरे सारे बंधनों को, बना दे तू मुझे पुरुषार्थी तेरे लिए ।
मिट जाए राह के सारी बाधाएँ, जो तुझको-मुझसे किए हुए है दूर ।
अब कुछ ना है जरूरी, हम तो डूबे रहना चाहते है प्यार के सुरुर में ।


- डॉ.संतोष सिंह