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Hymn No. 1111 | Date: 28-May-1999
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छीन ले तू हमसे सब कुछ, रह न जाए पास हमारे कुछ ।
छीन ले तू हमसे सब कुछ, रह न जाए पास हमारे कुछ ।
हमारा हम भी ले ले तू, मिट जाएगा जो अहम बन जाएगा तू ।
सारोबार कर दे प्रेम से तेरे, बिसर जाए मन के भेदों को ।
अहमीयत खत्म कर दे तू मेरी, निकल जाएगा दिल के सारे वहम ।
जन्म-मरण के फेरे से न हूँ डरता, डर है तो तुझसे बिछुडने का ।
लड़ाई मेरी मैं खुद लडूँगा, थमा दे मेरे हाथो में हथियार कृपा का ।
मौका न दूँगा तुझे, अब तेरे बताए राह पर बढ़ेंगे बेधड़क होकर ।
तेरा इशारा ही काफी होगा, अंजाम दे जाएगा उस काम को ।
याद न दिलाना मेरे मैं को, कुर्बान कर जाएँगे उसे तेरी महफिल में ।
दिल में खिलेगा गुल तेरे प्यार का, भूल जाएँगे उसमें सब कुछ ।


- डॉ.संतोष सिंह