Hymn No. 1113 | Date: 29-May-1999
झाँक लेने दे तू मुझे तेरी नजरों में, खो जाना चाहता हूँ अतूल गहराइयो में ।
झाँक लेने दे तू मुझे तेरी नजरों में, खो जाना चाहता हूँ अतूल गहराइयो में । पूर्णतः वहाँ तू होगा, तेरे सिवाय कोई नहीं, झाँकने का आभास न होगा खो जाएँगे गहराइयो में । फूटता है इन्ही निगाहों से प्रेम का ज्वार, पी लेंगे इसे, ना उतरे फिर कभी तेरा सुरूर । होंगे कहीं भी इस संसार में, दिल होगा तेरे इख्तिहार में, भूलेंगे सब कुछ, भूलेंगे न कभी तेरी यादों को । जब-जब दिल में छाएगा सुरूर तेरी यादों का, अकेले हो या भीड में, दिल मेरा गाएगा जरूर । कितना भी होगा कसूर मेरा, पाकर प्यार तेरा, निश्चिंततापूर्वक काटेगा हर सजा को । अंततः अंत होगा इस तन-मन के कर्मो का, पिलाया है जो तुमने निगाहों से अपने प्यार को । जीवन का मेरा हर दस्तूर बादल गया, कसम से जो प्यार हो गया तुझसे । रोना-गाना, खाना-पीना जो कुछ भी होगा तेरे वास्ते, न जाने देना किसी और रास्ते पर । मस्ती में हमें रखना, बेपरवाह होकर जीना सिखाना, सुख हो या दुख, प्यार करते रहे तुझसे ।
- डॉ.संतोष सिंह
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