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Hymn No. 1118 | Date: 30-May-1999
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अनंत संभावनाएँ छुपी हुई है तुझमें, खोने की तैयारी है मेरी उसमें ।
अनंत संभावनाएँ छुपी हुई है तुझमें, खोने की तैयारी है मेरी उसमें ।
जन्मा था जब कभी, तो तुझीसे, मरना मेरा तय हो चुका है तेरे पहलु में ।
ख्यालों का कोई अंत है न, प्यार की भी न है कोई सीमा ।
चारों दिशाओं में छाया हुआ है रूप तेरा, नहीं जाना ढूँढने मुझे और कही ।
अर्पित कर चुका हूँ सब कुछ तुझे, तेरे सिवाय कहाँ कुछ भी है मेरा ।
अंत कर दे मेरा तेरे अनंत में, प्यार में कुछ ना कुछ नया होना है जरूरी ।
लिखा हुआ जो न था किस्मत में, हो जाएगा माँ, तेरे पास आकर पुरा ।
कुछ भी ना है जरूरी इस जीवन में, माँ सिर्फ तेरे प्रेम के सिवाय ।
जो बात दिल में थी बरसों से अधुरी, कह लेने दे तू उसे आज पूरी ।
माँगने ना निकला हूँ कुछ, प्यार में प्यारी माँ का दीदार करने आया हूँ ।
अगर इसे भी माँगना कहते है, तो तू कभी ना करना पूरी ।
माँ तू बता, पुत्र कैसे रह पाएगा, बिन देखो प्यार कैसे कर पाएगा ।


- डॉ.संतोष सिंह