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Hymn No. 1119 | Date: 30-May-1999
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यार मेरे तुम भी हो अजीब, पूछते हो इस गरीब से ।
यार मेरे तुम भी हो अजीब, पूछते हो इस गरीब से ।
प्यार तू मुझे करता है या किसी और से, पूछकर मैं बहुत पूछाकर ।
ऐसा क्या हो गया, जो पा न सका तेरे प्यार को ।
दिल में कहाँ रह गई खराश, जो तेरे दिल में भेद कर गई ।
चाहाँ था हमने तुझे सदा से, कहाँ से आ गया ये दूसरा विचार ।
अंत करने चला था कामनाओं का, कैसे जुड गई तेरे रहते ।
स्वभाव नहीं है ये मेरा, कैसे लग गई आदत इसकी ।
कमजोर दुनिया को समझता था, कमजोरी कैसे बन गई मेरी ।
दो बारा-तीन बार, न जाने कितनी बार, खेल खेला है संग इसके ।
मुझे है पुरा विश्वास, तेरे प्रेम, मेरे विश्वास से अंत होगा आज इसका ।


- डॉ.संतोष सिंह