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Hymn No. 1120 | Date: 31-May-1999
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लाखो हमने देखे, प्रभु तुझसा नहीं देखा, दिया जो मौका आज तुझे जीतने का ।
लाखो हमने देखे, प्रभु तुझसा नहीं देखा, दिया जो मौका आज तुझे जीतने का ।
भाग्य का लिखा हुआ, बदला, जो तुमने चाहा तो हम आए करीब तेरे ।
याद जब-जब किया तुझको, एहसास कराया तुमने हमारे करीब होने का ।
जो कुछ भी पाया इस जीवन में, जब मिली शरण चरणो में तेरे, तब ही सब कुछ पाया ।
जान की कोई कीमत न रही, दिल चाहे अर्पण करने को तुझे अनमोल वस्तु ।
ऐ मेरे भाग्य के विधाता, सीखा दे तू हमको, मस्ती में जीवन पथ पर चलना ।
अब भी हमें कुछ मालुम नही, जो कुछ भी हुआ और होगा, सब कुछ तेरी मंजुरी से ।
चाहत है दिल में, कर दे रही-सही कमी पूरी, बदल दे दूरियों को नजदीकी में ।
लगन जो लग गई है दिल में, बढती जाए आग बनकर, खाक होना पड़ा तो कोई बात नहीं ।


- डॉ.संतोष सिंह