VIEW HYMN

Hymn No. 1121 | Date: 31-May-1999
Text Size
मेहबूब मेरे खेलना कोई तुझसे सीखे, प्यार करके परदा करना, कोई तुझसे सीखे।
मेहबूब मेरे खेलना कोई तुझसे सीखे, प्यार करके परदा करना, कोई तुझसे सीखे।
लगाई है आग दिल में तुमने, मारा छिंटा नजरों का और फिर सुलगता छोड़कर चला गया ।
दया की कोई आरजू न है, प्यार किया है तो प्यार करेंगे, होना पड़े चाहे तन को खाक ।
हाँ कच्चे खिलाडी जरूर है, पर दिल हमारा सच्चा है, हर बार की तरह जीतने का तुझे प्रयास करेंगे ।
सदियों का छाया हुआ है खौफ दिल पर, उससे उबरकर तेरा बनकर हम दिखाएँगे जरूर ।
कई बार गिरा राहे प्यार के पथ पर, बस कर तू हौसला आफझाई, तेरी ओर बढ़कर दिखाएँगे जरूर ।
सुरूर छाया है मन पर प्यार का, कह ले गुरूर या जोश, हमको तो होश नहीं प्यार में होने का ।
अभी भी मंजिल है बहुत दूर तो क्या, हाथों में हाथ तेरा, तो दूरी बदल जाएगी नजदीकी में ।
माना कि सिलसिला चल रहा है अंतहीन दिनों का पर आ गया है वक्त इसके खत्म होने का ।
जानते है कि जान जाएगी इस बार भी जरूर, पर जान की जान बनकर जाऊँगा ।


- डॉ.संतोष सिंह