VIEW HYMN

Hymn No. 1122 | Date: 02-Jun-1999
Text Size
मुलाकात होते-होते रह गई, दिल की बात जुबाँ पर आते-आते रूक गई ।
मुलाकात होते-होते रह गई, दिल की बात जुबाँ पर आते-आते रूक गई ।
कहने चला था कोई ऐसी बात, जो छू ले तेरे दिल को, हो जाता दीदार हमको ।
न जाने क्यों शरमा गया, मन में हिचक कैसे आ गई, जो दीवार का काम कर गई ।
ऐसा कौन-सा डर है जिसके खौफ के चलते हम हो जाते है दूर तेरे दर से ।
घर कर गया है मन में, हो नही सकता ऐसा, पर दिल कहता है होगा इक दिन तेरा जरूर ।
तेरा साथ पाने के वास्ते, जो तू कह वह कर दिखाने को हूँ तैयार मैं ।
सवाल खड़ा कर सकता है तू मुझपर कई, पर मेरा प्यार उड़ा है तेरी ओर ।
अब देरी किस बात की है, बजा दे मेरे दिल में, जोरदार प्यार की भेरी ।
रह सकता है प्रभु तू मेरे बगैर भी, मैं रह नहीं पाऊँगा तेरे बगैर पल भर भी ।
लिखा हैं खाक होकर अगर मिलना तुझसे, तो देर किस बात की, कर दे काम तमाम इसी पल तू मेरा ।


- डॉ.संतोष सिंह