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Hymn No. 1130 | Date: 05-Jun-1999
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बावरा हो गयो देखकर तुझे, हाल क्या होगा प्यार में म्हारो ।
बावरा हो गयो देखकर तुझे, हाल क्या होगा प्यार में म्हारो ।
होश उड़ गयो म्हारो, जो निगाहों से निगाह मिल गई हमारो ।
जादू कियो की प्यार तुमने, मुं खुदको भूलाकर बन गयो तारो ।
दोष कहाँ था थारो, देखकर तुझको जो दिल मचल गयो म्हारो ।
हर परवाह निकल गई मन से, जो दिल को प्यार भयो तुझसे ।
हो गया जीवन सुहाना, भेद मिट गयो मन का, प्यार मा तारो ।
गँवारा लागे सब कुछ, जो खोया रहता हूँ प्यार में तेरे ।
मोहे न चाहे अब कुछ, नजर झुकाए थारो जो दीदार करुँ दिल मा ।
बे अर्थ भयो म्हारे वास्ते सब कुछ, जैसे-जैसे प्यार परवाना चढ़ो तारो ।


- डॉ.संतोष सिंह