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Hymn No. 1131 | Date: 05-Jun-1999
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अल्पा जी के जन्मदिन के उपलक्ष्य में ।
अल्पा जी के जन्मदिन के उपलक्ष्य में ।
जन्मदिन मनाएँगे प्रभु के प्यार का आज, जो कर देती है प्रभु के दिल को गुलर्जार ।
प्रभु के पीछे दौड़ते देखा सबको, उसका प्यार देखकर दौडे प्रभु उसके पीछे कई-कई बार ।
प्रभु की निगाहें से बरसाती है प्यार का जाम, मतवाला बन जाए प्रभु भी उनके प्यार के सैलाब में ।
कशिश ऐसी है प्यार में उनके, निराकार खुदा मचल उठता है आकार लेने के लिए ।
जिस प्रभु पर किसीकी ना चली, वह घायल हो गया अपने प्यार का प्यार देखके।
बँध जाती है शमा जब गूंजती सुरीली आवाज उनकी, बेताब हो उठता है साक्षात मिलन के वास्ते ।
नसीब हमारा भी कम नहीं बिन कुछ किए हो गया दीदार प्रभु का, अल्पाजी की कृपा से ।
जीवन में इससे बढिया क्या मिलेगी सौगात, न जाने कितने जन्मों की मनोकामना पूरी हुई आज ।
एक ही रजा है, अब तू हो और तेरा प्रिय प्यार-
बैठे चरणों में निहारते हुए गाएँगे नये-नये इन्द्रधनुषी नगमें
चलता रहे ये दौर सदा, बुझने न देना प्यार की शमा को, तर जाएँगे हम जैसे न जाने कितने परवाने देखकर तेरा प्यार ।


- डॉ.संतोष सिंह