VIEW HYMN

Hymn No. 1135 | Date: 06-Jun-1999
Text Size
मगन भयो देख-देखकर माँ की सूरत, मिट गई मन की सारी जरूरत ।
मगन भयो देख-देखकर माँ की सूरत, मिट गई मन की सारी जरूरत ।
उमड़ पड़ो इतना प्यार भीतर से, रहा न काबू अपने ऊपर ।
पुछ पड़ो मैं माँ से, माँ तुमने इतनी देर क्यों की, मोहे बुलाने के वास्ते ।
दुनिया के हर रास्ते जाते थे तेरे दर की ओर, क्यों भटको मैं इधर-उधर ।
माँ मुस्काई सुनकर मोरी बतिया, मिलो थो तू कई बार, पहचाने ना मोहे इक बार
नींद थी गहरी इतनी तोरी, उठाने पर ना उठइयो, लगानी पड़ी चपत मोहे ।
सुनकर माँ की बातें, डूबो हर्ष मा दिल म्हारो, विनंती है म्हारी सुन ले प्यारी ।
रख दे सिर पर म्हारे आँचल तेरो, भटक न जाऊँ जग के मायावी गलियो में ।
मोहे चाहे ना कुछ, रहूं तेरे दर पर सदा, चाहे हाल कैसा भी होता रहे म्हारा ।
दाल न गलने देना तू म्हारी, लागे जो उचित वही करना तू म्हारे वास्ते ।


- डॉ.संतोष सिंह