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Hymn No. 1136 | Date: 06-Jun-1999
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मिलेंगे उस छलिए से आज, जो छलता आया है हमारे दिलों को ।
मिलेंगे उस छलिए से आज, जो छलता आया है हमारे दिलों को ।
प्यार के गीत सुनाकर हर लेता है, हमको हमी से ।
प्यार के दौर पर दौर चलता रहे, सुरूर ऐसा छाए, भूले हम सभी को ।
नशा और गहराए प्यार का, उसके सिवाय किसी का रूप नजर न आए ।
गुजर जाने का दिल करता है, प्यार में बहके उसके ।
गेसू भी साथ छोड़ देते है हमारा देखकर उसके, उससे मिलने के वास्ते ।
सँभाले नहीं सँभालता, है दिल, जब पहुँच जाते है पास उसके ।
रूनझुना पकडा के तू जी ना रुनझुना, तेरे सिवाय कोई चाहत रही नही ।
पार कर जाएँगे जीवन के हर सैलाब को, डूबकर तेरे प्यार के पैमाने में ।
मिटना तय कर चुका हूँ, तेरे प्यार में खो जाने के वास्ते ।


- डॉ.संतोष सिंह