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Hymn No. 1138 | Date: 08-Jun-1999
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सितम है तू हमारा, प्यार करता है हमी से, सितम ढाता है हमी पर ।
सितम है तू हमारा, प्यार करता है हमी से, सितम ढाता है हमी पर ।
प्यार में जुल्म करना कोई तुझसे सीखे, दिल को घायल करके, नाम दे देना प्यार का ।
यार माना की प्यार करना आता है तुझको, हमने भी सीखा प्यार करना तुझी से।
दोष न देती हूँ तुझे, तड़पता है जब दिल कहने से रोक नहीं पाता हूँ खुद को ।
तेरी महेरबानी है बहुत, आधे-अधुरे नाचीज को आने देता है करीब अपने ।
माना की हम जप नहीं पाते तेरे नाम को, पर ख्वाब देखते है तुझको लेके ।
बह गए सारे अरमान तेरे प्यार में, अब बहने ना देना दिल से तेरे प्यार को ।
यार चाहीए तुझे क्या बता दे इक बार, प्यार के सहारे अंजाम दे देंगे उसे ।
कानो-कान खबर न होने देता तू हमको, बाँध देता है कर्मो से संसार में ।
बाँधना था तो क्यों पिलाया तेरे प्यार के जाम को, रहने दिया होता हमको संसार में ।


- डॉ.संतोष सिंह