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Hymn No. 1141 | Date: 08-Jun-1999
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गीत कोई तुझे ऐसा सुनाऊँ, मचल उठे तू पास हमारे आने के वास्ते ।
गीत कोई तुझे ऐसा सुनाऊँ, मचल उठे तू पास हमारे आने के वास्ते ।
होगी दूरियाँ बहुत हमारे तन के बीच, कोई पल ऐसा न बीता, जो तू करीब न होगा हमारे दिल के ।
कहता नहीं करके दिखा सकता हूँ, तेरा प्यार पाने के वास्ते, जा सकता हूँ पागलपन की हद तक ।
रोकना हमें किसी के बस की बात नहीं, दिन हो या रात, चले जा रहे है हम प्यार की राह पर ।
किसी बात के लिए किसी को कसूरवार क्यों ठहराऊँ, कसूर तो है हमारा, जो प्यार किया है तुझसे ।
अब देखना न है कोई और जलवा, हम तो फिदा हो चुके है, तेरे प्यार भर जलवे पर ।
तसब्बूर होता नहीं है दिल को, बेमुरब्बत करना चाहते है प्यार तुझको ।
होगा मालिक तू संसार का, मानता नहीं दिल यार के सिवाय तुझको कुछ ।
झेल जाएँगे हर झटके तेरे प्यार के वास्ते, बिछाएँगे कदम-कदम पर फूल यार के वास्ते ।
खाकसार बहुत बड़ा तोप ना है, ये तो हुआ है पैदा तेरे कदमों की धूल से ।


- डॉ.संतोष सिंह