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Hymn No. 1145 | Date: 10-Jun-1999
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नयनों से ना देखना चाहूँ कोई और सूरत, जो देख ली तेरी मूरत ।
नयनों से ना देखना चाहूँ कोई और सूरत, जो देख ली तेरी मूरत ।
किसी और के बोल सुनना न चाहूँ, जब से सुना है तेरे गीतों को ।
बस गई है जेहन में हमारे महक तेरी, कोई और महक चाहिए ना मुझे ।
रंग में रंग गया हूँ प्यार के तेरे, चढाए ना चढ़ेगी किसी और का प्यार मुझपर ।
याद मेरी जाती रही है, जब से डूबा दिल मेरा खयालों में तेरे ।
बँध गया हूँ मैं तेरे प्यार के रिश्ते में, अब जरूरत ना रही किसी और रिश्ते-नाते की ।
हालाँकि कोई क्या कर पाएगा, मैं तो खलाश हो चुका हूँ तेरे प्यार में ।
लुटाने के वास्ते कुछ ना है पास मेरे, हम तो लूट चुके है तेरी मुस्कान पर ।
मन पर हुए है घाव कई, पर दिल है बेदाग अब तक प्रभु तेरे वास्ते ।
रह न गई है जरूरत किसी और की, जिंदगी जो जुड़ गई अब तेरे नाम से ।


- डॉ.संतोष सिंह