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Hymn No. 1147 | Date: 11-Jun-1999
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खाली झोली थी हमारी, भर दी तुमने अपने प्यार से ।
खाली झोली थी हमारी, भर दी तुमने अपने प्यार से ।
यार इस गए बीते को, बना दिया काम का अपने प्यार से ।
नाम भर का था जीवन, दाम बढ़ा दिया अपने प्यार से ।
जनम से पीड़ित था गमों का, मस्ती आ गई प्यार पाकर तेरा ।
गर्दीश में थे सितारे, चमक उठे फिर से प्यार पाकर तेरा ।
भयभीत रहता था अनहोनियों से, निश्चित हो गया प्यार पाकर तेरा ।
कभी कुछ करने न आया, करना सीखा दीयि प्यार देकर तेरा ।
ज्वाला जो दबी थी भीतर, फूटकर बह गई प्यार से तेरे ।
मालिक इस जहाँ में जो भी मिला, तेरे प्यार के सहारे ।
सच कहता हूँ होगी जरूरत बहुत कुछ की, तेरे प्यार के सिवाय न चाहिए कुछ


- डॉ.संतोष सिंह