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Hymn No. 1148 | Date: 11-Jun-1999
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जी लेंगे इस जहाँ में कैसे भी करके, जो प्यार न किया तुझसे, तो सब है बेकार
जी लेंगे इस जहाँ में कैसे भी करके, जो प्यार न किया तुझसे, तो सब है बेकार
व्यवहार की दुनिया में व्यवहार करेंगे बहुत, अगर प्यार की मिठास न घुली, तो हुआ सब बेकार ।
फर्क न हे मुझे किसी भी करम का, मेरे दिल में एक ही बात है तेरे प्यार को लेकर ।
दगा दे रहा है कोई तो कोई परवाह नहीं, हम तो प्यार करना चाह रहे है तुझसे बेपरवाह होकर ।
सता नहीं सकता अब कोई मुझे, दीवाना हुआ जो तेरे प्यार का, उससे ज्यादा क्या सताना हुआ ।
तड़पा नहीं सकता अब कोई मुझे, तेरे प्यार में तड़प रहा हूँ जितना, उससे ज्यादा क्या तड़पना होगा ।
इस मनचले के प्यार को आकार दे दे, जहाँ सुबह-शाम मिले मुझे आशियाना ।
समय के चक्र में फँसकर बन गया हूँ फसाना, गुजता रहूँ फिजाओं में, बनकर तेरे प्यार का अफसाना ।
आशीक हूँ मैं, दर्द कोई क्या देगा, अगर कहूँ दर्द ने जन्म लिया था मुझसे ।
खेल खत्म ना होनेवाला है, जब तक हम समर्पण ना करेंगे तुझमें, जीतना तेरा तय है ।


- डॉ.संतोष सिंह