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Hymn No. 1149 | Date: 12-Jun-1999
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प्यार करना चाहता हूँ तुझसे खुले आम, कोई समझौता नहीं ।
प्यार करना चाहता हूँ तुझसे खुले आम, कोई समझौता नहीं ।
चर्चा करुँगा दिल की बातों का सरेआम, कोई गुफ्तगूँ नहीं ।
मनमौजी बन जाना चाहता हूँ तेरे प्यार में, गुमसूम बनना नहीं ।
फिरना चाहता हूँ बावरों की तरह प्यार में, कायर कहलाना नहीं ।
प्यार में तेरे अजेय बन जाना चाहता हूँ, कोई जीत न सके ।
विश्वास हो मुझ में इतना, हर पल तू हो साथ मेरे, दास बनना नही ।
मंजिल पर चलना हो प्यार में डूबकर तेरे, न परवाह हो मंजिल की ।
दिल को कोई काटे मेरे, तो खून नहीं, निकले मूरत तेरी ।
बन जाऊं आवारा, जो हिचके नहीं प्यार करने से तुझे, कसर निकल जाए सारी ।
बनकर मजनू करुँ दीदार तेरा हर कण में, मन मेरा बदल जाए इतना ।


- डॉ.संतोष सिंह