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Hymn No. 112 | Date: 10-Oct-1997
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हर पल अर्पण कर दिया तेरे नाम,
हर पल अर्पण कर दिया तेरे नाम,
दिन हो या रात लेना है मुझको तेरा नाम ।
काम तो अनेक है, तेरा नाम लेना सबसे बडा काम ।
चुका नहीं सकता कोई तेरे नाम का दाम ।
जान दें के भी लेना पड़े तेरा नाम तो लेंगे ।
इससे बडा कोई ना है, प्रणाम तुझको ।
बदनाम हो कितना, अगर लेता है तेरा नाम वो ।
उससे महान इस जहाँ में कोई ना है ।
परम् पिता तुझे हर पल कोटि – कोटि मेरा प्रणाम ।
बना चुका हूँ मैं तुझको अपना, अब तू भी अपना लें ।


- डॉ.संतोष सिंह