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Hymn No. 1151 | Date: 13-Jun-1999
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रिमझिम- रिमझिम बरसे बरखा, बेकरार हो उठा दिल भीग के, तेरे प्यार के वास्ते ।
रिमझिम- रिमझिम बरसे बरखा, बेकरार हो उठा दिल भीग के, तेरे प्यार के वास्ते ।
चमके चम-चम बिजुरिया नभ में, दिखाए राह मेरे यार के दर का ।
घनघोर काली घटा छाए चाहूँ और, तरस उठा मन मोरा, यार का घूंघट उठाने के वास्ते ।
सन-सन करती बह चली चारों और शीतल बयार, विह्वल कर गई मोहे यार के वास्ते ।
सौंधी-सौंधी महक फूटी धरा से, पागल कर गई मुझे मधुर-मिलन के वास्ते ।
जो हो गया प्यार मेरे मल्हार, इच्छाओं के आग पर पडी प्रेम की फुहार ।
बाहर-भीतर से तरबतर हुआ मैं, अपने यार का शाश्वतमय प्यार पाकर ।
चारों और छाई हरियाली, अमृतमय प्रेम का पान करके संचार हुआ नवजीवन का ।
डूब गया सब कुछ प्रेम से उसके, जीवन जीते हुए जीने का होश मिट गया ।
बह चला मैं प्रेम की बूँद बनकर, आनंद के अनंत महासागर में मिलन के वास्ते।


- डॉ.संतोष सिंह