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Hymn No. 1153 | Date: 14-Jun-1999
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लाखों दर पर भटके थे हम तेरी तलाश में ।
लाखों दर पर भटके थे हम तेरी तलाश में ।
आया जब से जीवन में तू हमारे, न जाना कहीं और ।
देखते ही तुझे दिल बस गया चरणों में तेरे ।
अधूरी तलाश हो गई पूरी, आते ही करीब तेरे ।
मुरझाए जीवन में बहार आ गई, मिलते ही तुझसे ।
दिल की सारी बात यूँ कह गया, जो तेरा प्यार पा गया ।
कुछ भी ना बदला था, जैसा था वैसा ही था जीवन हमारा ।
पर अजीब-से आनंद में रहते है, प्यार भरी मस्ती में ।
ना बदलकर, सब कुछ बदल गया, तेरा साथ पाकर ।
अंतहीन जीवन को ठहराव मिल गया, जो तुझसे प्यार हो गया ।


- डॉ.संतोष सिंह