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Hymn No. 1154 | Date: 14-Jun-1999
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मेरी चाहत बदल गई, जो तेरे करीब आ गए ।
मेरी चाहत बदल गई, जो तेरे करीब आ गए ।
खाकसार की किस्मत चमक गई, जो तेरा प्यार पा गया ।
सबसे अजीज हुआ दिल, सानिध्य तेरा पा गया ।
काटों भरी राह पर एहसासा हुआ सुकून का, मिलकर तुझसे ।
मिल गई छाया तपती हुई, दुपहरीया को तेरे पहलु में रहके ।
कौडी का जीवन बेशकीमती हो गया, तेरी संगत में आकर ।
जीते-जी जन्नत का मजा आने लगा, तेरे प्यार में खोकर ।
जीवन जीने का ढर्रा बदल गया, जो समझदार बना प्यार में तेरे ।
कई जन्मो का खोया हुआ मिल गया, दिल में जो तू बस गया ।
तेरे प्यार में जो डूबा, उभर गए जीवन की हर परिस्थिति से ।


- डॉ.संतोष सिंह