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Hymn No. 1155 | Date: 14-Jun-1999
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प्यार है किसीसे संसार में, तो वह तू है ।
प्यार है किसीसे संसार में, तो वह तू है ।
इंतजार है किसीका संसार में, तो वह तू है ।
इनकार है किसीको संसार में, तो वह तू है ।
मर मिटने को तैयार है किसी पर तो वह तू है ।
एतबार है किसी पर संसार में, तो वह तू है ।
दरबार में जाकर किसी के टेकते है मत्था संसार में, तो वह तू है ।
गुजारीशों की फेहरिस्त लिए खड़े रहते है संसार में तो वह तू है ।
शिकायत करते है किसी के मन ही मन में, संसार में तो वह तू है ।
प्यार का तराना गाते है किसी के वास्ते संसार में, तो वह तू है ।
कुछ भी करते है जब भी, तेरे सिवाय रहता नहीं कोई मन में ।


- डॉ.संतोष सिंह