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Hymn No. 1157 | Date: 15-Jun-1999
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ठाकुरजी मैंने ब्याह रचायो तेरे नाम से, रह ना गयो कोई काम को ।
ठाकुरजी मैंने ब्याह रचायो तेरे नाम से, रह ना गयो कोई काम को ।
दहेज मा ना ला सको माखन-मिश्री, मैं तो भजतो आयो तेरो नाम ।
जाम जो पी लियो तारो नाम को, छुटी पूजा मोरी, लागो तेरो प्यार का रोग ।
भक्ति की शक्ति ना है म्हारामाँ, हूँ तो बेखबर हो गयो देखते तुझे ।
जो तने लागे दे-दे इसको नाम, हर सजा मंजूर तारा वास्ते हमको ।
प्यार मा बेखबर हो जाइने, हर रोज दस्तक दूँ तारा दरबार मा ।
आना-आना थी कोई राग छे ना गंभीर, हूँ तो बनी गयो तारो प्यार नो मरीज ।
दया ना करजे तू मारा ऊपर, याद आवा माटे प्यार मा खूप तड़पावजे ।
म्हारे कइक पण ना हें मंजूर तारा सिवाय, बन जावा दे तारा दरबार नो हजुरीयों
एकमात्र अवे तू छे तारा सिवाय कोई ना दुजो, आवाज छे दिल ना आ हमारा ।


- डॉ.संतोष सिंह