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Hymn No. 1158 | Date: 16-Jun-1999
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जब से काका तुझको हमने देखा, हुआ है पागल दिल मेरा ।
जब से काका तुझको हमने देखा, हुआ है पागल दिल मेरा ।
खोया हुआ था मायावी दुनिया में, ज्ञान हुआ प्राप्त पास आकर तेरे ।
जी रहे थे जीवन बदतर जानवरो से, जीने का अर्थ बदला संग तेरे ।
उलझा हुआ मन था कर्मों के चंगुल में, मुक्त कराया तुमने हमें ।
प्रीत जो सुन रखी थी, वह भाव जगाया दिल में तुमने हमारे ।
आयाम दिया गुरु-शिष्य के रिश्ते को, धर्म का सार समझाकर ।
बदलते पाया दुनिया के हर अर्थों को, व्यवहार में जीना तुझसे सीखा ।
प्रेम की शाश्वत परिभाषाओं का सार बताकर, गोता लगाना तुमने सिखाया ।
जीवन के यथार्थ के संग रहकर, आत्मज्ञानी बनने की राह दीखाया ।
जो तुझसे मिला वह किसीसे ना पाया, जो सब में था, वह तुझमें है सदा से ।


- डॉ.संतोष सिंह