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Hymn No. 1162 | Date: 17-Jun-1999
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जिस दिन आएगा तू बारात लेकर, होंगे आँखों में आँसू तेरा प्यार देखकर ।
जिस दिन आएगा तू बारात लेकर, होंगे आँखों में आँसू तेरा प्यार देखकर ।
सितमगर यह जान निकले पहलु में तेरे, मनाएँगें उस दिन हम अपना जन्मदिन।
रोक ना सकेगा तब कोई मुझे, होकर सवार जाएँगे तेरे दिल में ।
बिछुडने-मिलने का होगा खेल खत्म, बार-बार की मुलाकात बदलेगी मिलन में ।
दोष कोई ना देगा किसी को, दोष तो था जिंदा होकर अलग रहने में ।
मौत से अंत ना होता है किसी का, यह तो दीदार कराता है यार का ।
धोखे में थे आज तक हम, जो खुली आँखों से ख्वाब देखते थे ।
गुलाम हाजिर होगा तेरे दरबार में, देखने को तेरी सल्तनत सारे जहाँ में ।
हर आह पर निकलेगी दिल से वाह, जान जाती रहेगी, जश्न मनाएँगे प्यार का ।
छुटेगा सब कुछ, लुफ्त उठाएँगे हम, जो तेरी महफिल में शिरकत करेंगे ।


- डॉ.संतोष सिंह