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Hymn No. 1163 | Date: 17-Jun-1999
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बदल रहा है सब कुछ, बिना बदले रहा ना कोई ।
बदल रहा है सब कुछ, बिना बदले रहा ना कोई ।
जो सोया हुआ था वह भी बदला, जो रोया वह भी बदला ।
बदलने से रुका ना कोई, बदलता रहा है चिरकाल से सब कुछ ।
शाश्वत भी बदला, इक बार नहीं, कई-कई बार बदला ।
खेल-खेला उसने बदलकर माया में अपनी छाया को ।
बदलना है उसको भाया, कई बार निराकार से आकार में बदला ।
ऊपर से हर एक का रूप-रंग बदला, भीतर से शाश्वत रहा ।
जिसने उसको पहचाना, वह भी बदला शाश्वत रूप में ।
आश्वस्त रह ना सका कोई, हर काल में बदलना पड़ा सभी को ।
बदलने का अंजाम दिया प्यार ने, शाश्वत-प्यार, शाश्वत सब है एक ।


- डॉ.संतोष सिंह